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अंजीर की खेती कैसे करे

अंजीर के फायदे, अंजीर की खेती कैसे करे, उन्नत किस्में - पूरी जानकारी

अंजीर के फायदे, अंजीर की खेती कैसे करे, उन्नत किस्में - पूरी जानकारी

दोस्तों आज हम बात करेंगे,अंजीर(Anjeer) के विषय में की अंजीर के क्या फायदे हैं, अंजीर को कैसे खाना चाहिए,अंजीर(Anjeer) की विभिन्न प्रकार की जानकारी हम आपको अपनी इस पोस्ट में देंगे। अंजीर(Anjeer) से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारियों को प्राप्त करने के लिए हमारी पोस्ट के अंत तक जरूर बने रहे। 

अंजीर(Anjeer):

अंजीर को फ़िग(Fig) भी कहते है, यह फ़िग(Fig) नाम अंग्रेजी है। तथा अंजीर(Anjeer) का वास्तविक नाम फ़िकस कैरिका हैं।अंजीर पक जाने के बाद पेड़ से गिर जाता है।अंजीर(Anjeer) के पके हुए फल को लोग बहुत ही चाव के साथ खाते हैं। तथा सूख जाने के बाद उचित दाम पर बिकता है।अंजीर(Anjeer) के फल के टुकड़ों को सुखाकर रख लेते हैं और उसको मार्केट में बेचते हैं। अंजीर पौष्टिकता से भरे होने के कारण लोग इसे पीसकर दूध और चीनी के मिश्रण में मिलाकर पीते तथा खाते भी हैं। 

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अंजीर(Anjeer) खाने के फायदे:

अंजीर(Anjeer) खाने के एक नहीं अनेक फायदे होते हैं लेकिन कुछ फायदों के बारे में हम आपको बता रहे हैं जैसे : अंजीर(Anjeer) खाने से हृदय को विभिन्न प्रकार का फायदा होता है, विभिन्न रोगों से बचाव होता है ,अंजीर(Anjeer) खाने से हमारी हड्डियां मजबूत रहती है।अंजीर(Anjeer) हमारी विभिन्न प्रकार की प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है, यदि किसी का वजन ज्यादा है तो रोजाना अंजीर(Anjeer) का सेवन करने से वजन कम करने में मददगार साबित होता है, अंजीर की मदद से रक्तचाप में कमी आती हैं , यह कुछ फायदे हैं अंजीर खाने के अंजीर(Anjeer) का सेवन करना हर प्रकार से फायदेमंद होता है। तो आईये दोस्तों, तोड़ें रोगों की ज़ंजीर, रोज खाएं अंजीर।

सुबह खाली पेट अंजीर(Anjeer) खाने के फायदे

सुबह-सुबह अंजीर(Anjeer) खाने से ब्लड प्रेशर को काफी अच्छा कंट्रोल मिलता है।अंजीर में पोटैशियम की भरपूर मात्रा मौजूद होती है। ये भी पढ़े: लीची : लीची के पालन के लिए अभी से करे देखभाल

 

यदि कोई व्यक्ति ब्लड प्रेशर का मरीज है आपके घर या किसी अन्य के प्रति यदि आप अपने अच्छी सोच रखते हैं तो आप उसको खाली पेट रोजाना अंजीर(Anjeer) खाने की सलाह दे सकते हैं। डायबिटीज के मरीज यदि रोजाना सुबह उठते ही अंजीर(Anjeer) खाएंगे, तो उनकी डायबिटीज की बीमारी को दूर करने में अंजीर से काफी सहायता मिल सकती है, इसीलिए अंजीर(Anjeer) को खाना चाहिए खाली पेट रोजाना।

अंजीर(Anjeer) की खेती

अंजीर(Anjeer) की खेती शीतोष्ण और शुष्क जलवायु में की जाती है। भारत देश में अंजीर(Anjeer) की खेती करने वाले कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनका नाम यह है जैसे: कर्नाटक, महाराष्ट्र ,तमिलनाडु ,गुजरात, उत्तर प्रदेश आदि क्षेत्रों में अंजीर(Anjeer) की पैदावार होती है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अंजीर के पौधे लगभग 2 साल बाद उत्पादन के लायक हो जाते हैं।अंजीर(Anjeer) में कोहरे को सहने की अपनी क्षमता होती है।अंजीर(Anjeer) लोगों में बहुत ही लोकप्रिय फलों में से एक है।अंजीर की खेती दक्षिणी व पश्चिमी अमेरिका व मेडिटेरेनियन तथा उत्तरी अफ्रीकी देश में भारी मात्रा में अंजीर(Anjeer) की फसल को उगाया जाता है।अंजीर की बढ़ती मांग को देखते हुए कुछ वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा भी इसकी फसल को उगाने का प्रबंध कृषि विशेषज्ञ करते हैं।अंजीर(Anjeer) की फसल काफी गुणवत्ता युक्त उत्पादन होती है।

अंजीर(Anjeer) की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु:

अंजीर(Anjeer) की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु का चयन करने के लिए कृषि विशेषज्ञ उपोष्ण और गर्म-शीतोष्ण ही उचित समझते हैं , क्योंकि इन जलवायु के जरिए अंजीर(Anjeer) काफी अच्छी तरह से फलता फूलता है।अंजीर(Anjeer) के लिए सूखी छाया  बहुत ही अच्छी होती है। किसान अंजीर की खेती हर प्रकार की जलवायु में कर सकते हैं परंतु अंजीर एक गर्म पौधा होने के कारण इसकी जलवायु उपोष्ण व गर्म-शीतोष्ण सबसे अच्छी होती है। अंजीर(Anjeer) के फलों का विकास करने के लिए वायुमंडल का शुष्क होना बहुत ही लाभदायक होता है अंजीर(Anjeer) की परिपक्वता के लिए बहुत आवश्यक होता है।अंजीर पर्णपाती वृक्ष होने की वजह से इस पर बहुत कम पाले का प्रभाव होता है।

अंजीर(Anjeer) के लिए भूमि का चयन

किसान अंजीर(Anjeer) की पैदावार के लिए किसी भी प्रकार की भूमि का प्रयोग कर सकते हैं ,परंतु किसानों द्वारा सलाह अनुसार अंजीर(Anjeer) की खेती के लिए सबसे अच्छी भूमि दोमट मिट्टी और मटियार दोमट होती है। इन मिट्टियों में जल निकास काफी अच्छी तरह से हो जाता है , इसीलिए इसको सबसे अच्छी श्रेष्ठ मिट्टियों की श्रेणी में रखा गया है।

अंजीर(Anjeer) की उन्नत किस्में:

अंजीर(Anjeer) की खेती को निम्नलिखित तीन वर्गीकरण में विभाजित किया गया है

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बी एफ 1 प्रजाति, बी एफ- 2, और बी एफ- 3 प्रजातिया। बी एफ- III प्रजाति सबसे उत्तम  प्रजाति मानी जाती है। अंजीर की इस प्रजाति को बडका अंजीर’ किस्म के नाम से जाना जाता है। भारत के निचले पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों में इनकी काफी किस्म में पाई जाती है।

अंजीर(Anjeer) के पौधे तैयार करना;

अंजीर(Anjeer) के पौधे तैयार करने के लिए, पौधों को एक से 2 सेंटीमीटर मोटी तथा 15 से 20 सेंटीमीटर लंबी इनकी परिपक्व कलमों के आधार पर इनको तैयार किया जाता है। सर्दियों में अंजीर की कलमें को लगभग 1 से 2 महीने तक कैल्सिंग की मिट्टी में दबा कर रखा जाता है।अंजीर(Anjeer) की कलमें फरवरी से मार्च के तापमान के बढ़ने के कारण रोपित किए जाने लगती है। अंजीर(Anjeer) की खेती के लिए गोबर की खाद सबसे अच्छी होती है ,तथा फास्फोरस, पोटाश खाद, का भी प्रयोग किया जाता हैं। अंजीर(Anjeer) की खेती के लिए एक यह दो महीने के भीतर इसमें नत्रजन खाद 10 से 15 ग्राम प्रतिवर्गमीटर कलमें रोपित की जाती हैं।

अंजीर(Anjeer) की सिधाई व काट-छांट:

किसान अंजीर(Anjeer) की सिधाई इस प्रकार करते हैं जिससे या पूरी तरह से बराबर पौधों के रूप में फैल कर बराबर हो जाए। पौधों के हर हिस्से में सूर्य की रोशनी पहुंचना आवश्यक होती है। जिससे इसकी उत्पत्ति हो सके।अंजीर(Anjeer) के फल 1 से 2 साल के अंदर नई शाखाओं पर निकलना शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति में टहनियों की शाखाओं को अच्छा बढ़ावा देना चाहिए ,ताकि फल ज्यादा आ सके।अंजीर(Anjeer) के पुराने पेड़ों में विभिन्न प्रकार की समय समय पर काट छांट करते रहना चाहिए। जो टहनियां रोग ग्रस्त तथा सुख जाए उनकी शाखाओं को अच्छी तरह से तोड़कर काट-छांट करने के बाद अलग कर देना चाहिए। 

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अंजीर(Anjeer) के पौधों में कीटों की रोकथाम तथा रोगों से मुक्ति :

किसानों के अनुसार अंजीर(Anjeer) में कोई तरह का कोई कीट या फिर रोग नहीं लगता है,परंतु कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ परिस्थितियां ऐसी हो जाती है। कि इनके छाल और पत्तों में कीट का बहुत भयानक  प्रकोप पड़ जाता है। अंजीर(Anjeer) के पौधों को कीट और रोग से बचाने के लिए किसान इनकी रोकथाम के लिए 3 मिलीलीटर एंडोसल्फान और क्लोरोफायरीफोस प्रति लीटर पानी में मिक्स कर पौधों पर छिड़काव करते हैं, जिससे पौधों की सुरक्षा हो सके।

अंजीर(Anjeer) की तुड़ाई और पैदावार

जब अंजीर(Anjeer) के फूल पूरी तरह से परिपक्व हो जाए, तब इनकी तुड़ाई कर देनी चाहिए। ज्यादा मात्रा में फलों को तोड़ना चाहते हैं, तो एक पानी से भरे हुए बर्तन में एकत्रित कर रख देना चाहिए। अंजीर को 400 से 500 ग्राम से ज्यादा  एक बर्तन में नहीं रखना चाहिए। 

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 अंजीर(Anjeer) के फल उपोष्ण क्षेत्रों में बसन्त ऋतु में मई में पक कर तैयार हो। हम उम्मीद करते हैं, अंजीर(Anjeer) का यह आर्टिकल आपको काफी पसंद आएगा। हमारे इस आर्टिकल में अंजीर के फायदे ,अंजीर(Anjeer) की पूरी जानकारियां दी गई है। हमारी इस आर्टिकल के जरिए अंजीर(Anjeer) की पूरी जानकारी प्राप्त करें ,तथा अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

अंजीर की खेती से कमा सकते हैं किसान अच्छा मुनाफा

अंजीर की खेती से कमा सकते हैं किसान अच्छा मुनाफा

अंजीर की खेती हर प्रकार की जलवायु में की जा सकती हैं। लेकिन अंजीर की खेती ज्यादातर गर्म और शुष्क मौसम में की जाती है। अंजीर के पौधे को किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता हैं ,लेकिन ज्यादा बेहतर दोमट मिट्टी को माना जाता है। अंजीर के खेत में जल निकासी का भी प्रबंध होना चाहिए ताकि ज्यादा पानी होने पर, जल को सींचा जा सके।

अंजीर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान क्या होना चाहिए 

अंजीर की खेती के लिए शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। अंजीर की खेती कम वर्षा वाले क्षेत्र में ज्यादा अच्छे से की जा सकती है। अंजीर की फसल गर्मियों में पक कर तैयार हो जाती हैं। अंजीर की फसल को तैयार होने में लगभग 25-30 डिग्री टेम्परेचर की आवश्यकता रहती है। सर्दियों में गिरने वाला पाला अंजीर की फसल के लिए हानिकारक रहता हैं।

अंजीर की फसल के लिए खेत को कैसे तैयार करें

अंजीर का पौधा यदि अच्छी से लग जाता हैं तो ये 40-50 साल तक फल देता है। इसीलिए अंजीर की खेती करने से पहले किसानो द्वारा खेत  की जुताई अच्छे से कर लेनी चाहिए,ताकि पहली फसल के अवशेष खेत में न रहे। खेत की जुताई कम से 2 बार करें उसके बाद खेत में अधिक उत्पादकता के लिए गोबर खाद का भी उपयोग कर सकते है।

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इसके बाद खेत को कुछ दिनों के लिए खाली छोड़ दे ,उसे सूर्य की रौशनी लगने दे उसके बाद जब खेत भुरभरा दिखाई देने लगे  उसमे फिर से खाद और उर्वरक दे। ऐसा करने से खेत की उर्वरकता बढ़ेगी। इसके बाद खेत को रोटावेटर से जुताई करें फिर उसके बाद खेत में सहाल देकर उसके समतल कर ले। ऐसा करने से खेत में पानी भरने और रुकने जैसे समस्याएं नहीं रहेगी।

कैसे लगाए खेत में अंजीर के पौधे

खेत को समतल करने के बाद इसमें गड्डो को तैयार किया जाता हैं ये गद्दे 2 फ़ीट चौड़े और 1 फ़ीट गहरे होते है। इन गड्डो को 5 मीटर की दूरी पर तैयार किया जाता है। इन गड्डो में गोबर खाद और रासायनिक खाद दोनों को मिलाकर भरा जाता है। ऐसा करने से पौधे में भी बढ़ोत्तरी होती हैं और साथ ही खेत की उर्वरकता भी बनी रहती है। पौधे को गड्डे में लगाने के बाद 1.5 सेमी तक मिट्टी डालकर पौधे को दवा दे। अंजीर की खेती को ज्यादातर अगस्त और जुलाई माह में करना बेहतर माना जाता हैं।

अंजीर की खेती में लगने वाले रोग

अंजीर की खेती में वैसे तो बहुत ही न के बराबर रोग लगते हैं ,लेकिन कभी कभी ज्यादा बारिश होने की वजह से इसमें कीट लग जाते हैं। यह कीट पौधे के पत्तों को खाकर उनमे होने वाले विकास को प्रभावित करते है। 

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अंजीर के पौधे की सिंचाई 

अंजीर की खेती के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं रहती हैं, तापमान के अधिक होने पर ही इसमें पानी लगाया जाता हैं। साथ ही सर्दियों में  भी इसे बहुत कम पानी जरुरत पड़ती हैं ,20-25 दिन के अंतराल पर इनमे पानी दिया जाता है। इसीलिए अंजीर को कम पानी वाले इलाको में भी किया जा सकता हैं।

अंजीर के पौधे में होने वाली खरपतवार 

अंजीर की खेती में कुछ माह बाद खरपतार होने लगती हैं जो फसल को क्षति पहुंचा सकती है। इसीलिए किसानो द्वारा खेत में समय समय पर नराई और  गुड़ाई का काम किया जाता हैं। ताकि खेत में से खरपतवार को निकला जा सकें। इसके लिए किसान कीटनाशक का भी उपयोग कर सकते है। 

अंजीर के फलो का पकाव 

 इस फल के पकने का रंग अंजीर की किस्म पर निर्भर करता हैं क्यूंकि अंजीर की बहुत सी किस्म होती है। अंजीर का फल पक कर बहुत ही मुलायम हो जाता है। अंजीर के फल को तोड़ने के लिए ग्लब्स का उपयोग करें , क्यूंकि अंजीर के फल को तोड़ने पर एक प्रकार का दूध निकलता हैं। यदि ये शरीर पर कही लग जाता हैं तो इससे त्वचा से सम्बंधित रोग भी हो सकते है। फल को तोड़ने के बाद एक बर्तन में पानी भर कर उसे पानी में डाल दे।

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अंजीर की खेती ज्यादातर तमिल नाडु ,महाराष्ट्र ,कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में की जाती हैं। अंजीर का पेड़ लम्बे समय तक फल देता हैं ,अंजीर आय बढ़ाने का भी मुख्य स्रोत हैं। अंजीर शरीर को भी फिट रखने में सहायक होती है। अंजीर की खेती किसानो द्वारा बहुत ही कम लगत पर की जा सकती हैं और इससे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। अधिक उत्पादन के लिए किसान अंजीर की अलग अलग किस्मो को भी उगा सकते है।